नवरात्रि के पहले दिन, माँ शैलपुत्री की पूजा, चंद्रोष से मिलती है मुक्ति, भोग, मंत्र और शुभ समय जानिए

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Maa Shailputri

नवरात्रि का जश्न आज से शुरू हो गया है। नवरात्रि का प्राथमिक दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री प्रकार के लिए प्रतिबद्ध है। हिमालय पर्वत की छोटी लड़की के रूप में, उसे शैलपुत्री कहा जाता है। इस प्रकार की माँ दुर्गा अत्यंत शांत, नाजुक और सम्मोहक हैं। घटस्थापना के साथ, माँ शैलपुत्री को विधि-विधान से पूजा की जाती है।

देवी सती का हिमालय में पुनर्जन्म हुआ और फिर उन्हें शैलपुत्री कहा गया। ऐसा माना जाता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है। माँ शैलपुत्री के माथे पर आधा चन्द्रमा स्थापित है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं में कमल है। उनकी सवारी नंदी मानी जाती है।

या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।

शुभ समय – सुबह 6:27 से सुबह 10:13 तक (छात्रों के लिए महान)
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:44 से 12:29 तक (सर्वजन)
स्थिर लग्न (वृश्चिक) – सुबह 8.45 से 11 बजे (शुभ चौघड़िया, व्यापारियों के लिए सर्वश्रेष्ठ)

ऐसा माना जाता है कि मां शैलपुत्री को सफेद चीजें पसंद हैं। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को सफेद मिठाई अर्पित की जाती है। इसके अलावा, उन्हें सफेद फूल अर्पित करना भी बहुत शुभ माना जाता है।

नवरात्रि के पहले दिन, माँ शैलपुत्री की पूजा में सभी नदियों, तीर्थों और दिशाओं का आवाहन किया जाता है। नवरात्रि पूजा के पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक कपूर का उपयोग बहुत ही शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि मां दुर्गा की पूजा में कपूर का उपयोग करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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